Thursday, 3 July 2014

मशऱुफ है सब ……



मशऱुफ है सब ……

मशऱुफ है सब  अपनी जिंदगी में,
एक पल किसी का मिल  जाए‌‌।
हम तो किसी के हो ना शके,
चल किसी और के हो जाए।

जिंदगी ने दिए कुछ ऐसे जख्म,
कि दवा ददॅ का कारण बन जाए।
फटे बिखरे  है जिंदगी के पन्ने,
समेट लू उसे तो उसे तो किताब बन जाए।

हँस लेते है कुछ लोग,
जब कोई गलती हो जाए।
इक मुकाम पर पहुँचकर हमने देखा जब,
तो हँसनेवाला कोई नजर न आए।

तीरथ में आकर बिखरे वो भी,
जैसे खुद कंकर बन गए।
हम से निकल के वो अलग हुए थे,
अंत  मे हम ही में आकर मिल गए।